क्या है सच्चाई? क्या शिवजी को भांग पीते हुए चित्रित करना सही है?

mahaShivratri bhang use worng or right
MahaShivratri bhang use wrong or right?

स्वामी जी जिन दिनों रुड़की में थे तो लाला कन्हैयालाल साहब इन्जीनियर ने प्रश्न किया कि मद ( नशा ) की अवस्था में चित्त एकाग्र हो जाता है और जिस विषय की ओर चित्त आकृष्ट होता है उसी में डूबा रहता है । ”
इसलिए इस अवस्था में जैसा अच्छा ईश्वर का ध्यान हो सकता है वैसा अन्य अवस्था में नहीं । ”

स्वामी जी ने कहा कि मद का नियम ऐसा ही है जैसा कि आप वर्णन करते हैं कि जिस वस्तु का ध्यान चित्त में होता है मनुष्य उसी में डूबा रहता है परन्तु वस्तुओं की वास्तविकता का ठीक ध्यान अनुकूलता से हुआ करता है । जब हम एक वस्तु का ध्यान करते हैं और उसका सम्बन्ध दूसरी वस्तुओं के साथ करके देखते हैं और उस वस्तु और अन्य वस्तुओं में सम्पर्क स्थापित करके देखते हैं तब उस वस्तु का ठीक ध्यान चित्त में प्रकट होता है और अन्यथा उस वस्तु का ध्यान वास्तविकता के विरुद्ध प्रकट हुआ करता है और गुणी और गुण की अपेक्षा नहीं रहती ।

” इसलिए मद की अवस्था में ईश्वर का ध्यान झूठा और अवगुणों के साथ होता है ”

प्रश्नकर्त्ता को यह उत्तर बहुत अच्छा लगा और पूर्ण सन्तोष हो गया ।

ला . साहब स्वयं मद्य नहीं पीते थे प्रत्युत उस से घृणा करते थे परन्तु लोगों की वर्तमान शंका को स्वयं उपस्थित करके उत्तर माँगा था ।

( पं . लेखराम कृत जीवनी , पृष्ठ ३९५ )

पाठक स्वयं विचार कर सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग करे। -डॉ विवेक आर्य (आर्य समाज)

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